SZZ SB - -
I DON'T KNOW WHAT IS THIS?
एक ज़माना था दिल हमारा भी मचला करता था
दिन रात खुवाबबों मे ख़यालो मे कोई रहता था
तब शायर-ए-इश्क़ मे हम ही हम नज़र आते थे
अब ना ख़ुशी रही ना ग़म हम हँसी के कर्ण खोज रहे है
इससे अब कोई अदभुद खोज कहे या आविष्कार
शायर-ए-इश्क़ मे दिन रात कैसे गुज़र जाते थे
इस रहस्य का पर्दा फ़ाश करने मे की कसर नही छोड़ रहे है
शायद उम्र का तक़ाज़ा था, और समय की ना कोई फ़िक्र
तभी योइंदिया पे इश्क़ नही तो शायर-ए-डार्द मे सही
भारी दिल और नम आँखो से ताक़ते घंटे गुज़र देते थे
दासवी मे हिंदी की परीक्षा मे चाहे नंबर काम आए हो
शायरी केरते वक़्त लफ्ज़ कहा से आते, ये भी अपने मे एक रहसये है
ख़ुद की दीवानगी कहे या यहा के लोगों का अपनापान
रहस्यो का पिटारा तो यूह भरता ही रहेगा...!!
मेरी इस खोज मे आप भी भग्यदार बने, अपनी भी कुछ राय पेश करे ...
शायद इसी के तहत यहा भी महफ़िल ज़म जाएगी
कुछ खट्टी कुछ मीठी, कुछ नमकीं कुछ तीखी
एक ज़बरदस्त कविता यहा पे भी बन जाएगी.


有種點我
http://encyclopediadramatica.com/File:Pain1.jpg